Short Moral Story in Hindi – चोरों की गठरी में गुठली

Short Moral Story in Hindi – Hey दोस्तों, आज आपके लिए हमारे एक लेखक दोस्त ने एक बहुत ही इंटरेस्टिंग स्टोरी लिख कर भेजा है, इस शार्ट स्टोरी में आपको बहुत ही बड़ी एक सीख मिलने वाला है, इसलिए इसे मिस मत कीजिये। तो चलिए शुरू करते हैं –

 

Short Moral Story in Hindi – चोरों की गठरी में गुठली

 

जंगल के सुनसान रास्तों से ज्ञानचंद और ध्यानचंद नामक दो शातिर चोर जा रहे थे यह चोर इतने शातिर थे कि जो तीर ये दूसरों के लिए फेंकते वो उल्टा इन्ही को आकर लगता फिर भी किसी मजबूरी नें इन्हें चोर बना दिया।

 

ध्यानचंद “अब जो होना था वो हो गया आगे के घटनाक्रम पर ध्यान दें तो बेहतर होगा”

 

ज्ञानचंद “हाँ, बीते हुए बुरे वक्त को जल्दी भूल जाने से मन शांत हो जाएगा”

 

यह बातें चल ही रही थी कि एक फल का व्यापारी गुजरता हुआ दिखाई दिया।

 

अब होना क्या था?

 

व्यापारी को लूटने की तैयारी शुरू करने लगे लेकिन दोनों ही सीधे जाकर उससे भिड़ना नहीं चाहते थे हो सकता है कि पीछे कोई ऐसी घटना घटित हुई होगी जिसके कारण वो ऐसा कर रहे थे।

 

खेर अब तय ये हुआ की दोनों एक साथ जाकर पता करेंगे कि व्यापारी के पास धन है या नहीं ? और यदि हैं तो कितना हैं ?

लोगों की मानसिकता इन चोरों के बारे में जो भी रही हो लेकिन ये अपने आप को कोटिल्य से कम नहीं समझते हैं।

 

अब इन विद्वान चोरों के मन में विचार आया कि व्यापारी से मुलाकात व्यापारी बनकर की जाए तो उसकी संपूर्ण जानकरी हाथ लग जाएगी।

 

अब होना क्या था ? बदल दिया भेष और पहुँच गए मिलने।

 

संपत्ति की जानकारी लेने के लिए चोरों ने व्यापारी से झूठा जातीय रिश्ता बनाकर स्वयं को जातिगत भाई बताया।

 

व्यापारी ने अपनी और अपने व्यापार के बारे में बातें की व साथ ही रात होती देख व्यापारी ने दोनों चोरों को भोजन हेतु आमन्त्रित किया। वक्त की नजाकत को समझते हुए दोनों चोरों ने हामी भर दी।

 

अब खाना बनाने से पहले दिन भर की यात्रा से हुई थकान दूर करने के लिए व्यापारी ने आराम करने का निश्चय किया।

 

अभी तक व्यापारी को निंद नहीं आई थी कि चोरों की बातें शुरू हो गई |

 

ज्ञानचंद “खाना खाने के बाद जब ये सो जाएगा तब हम माल को समेट लेंगें”

ध्यानचंद “हाँ, हमें भी खाना खा लेना चाहिए रात को चलना जो है”

 

उनकी सारी बातें व्यापारी ने सुन ली और मन ही मन घबराहट सी होने लगी, इतने में एक विचार मन में आया व सारी चिंता गायब सी हो गई।

 

इसके बाद व्यापारी ने खाना बनाया और तीनों नें भोजन कर लिया।

 

व्यापारी ने चोरों से पूछा “अच्छा तो तुमने अपने गाँव का नाम नहीं बताया ? भाई”

ज्ञानचंद (हड़बड़ाता हुआ) “जी जिवंत नगर”

व्यापारी “अरे वाह! वहाँ के सेठ सागरमल को जानते ही होंगे ? बहुत बड़े जागीरदार है वो”

ज्ञानचंद (चोर) “अरे! उन्हें तो गाँव का बच्चा – बच्चा पहचानता हैं हमारे तो वो वर्षों से मित्र हैं”

व्यापारी “अच्छा! अब तो आपको मेरा काम करना ही होगा”

ध्यानचंद (बीच में) “कैसा काम व्यापारी जी ?”

व्यापारी “दरअसल मैं अपनी महिने भर की सारी कमाई सेठ के पास जमा करवाता हूँ ताकि डकैती से बच सकूँ और आवश्यकता पड़ने पर सेठ से धन वापस ले सकूँ”

ज्ञानचंद “इसमें हमारा क्या काम व्यापारी जी ?”

व्यापारी “ऐसा हैं कि आप गाँव तो जा ही रहे हो तो इस धन की गठरी को मेरे नाम से जमा करवा देना अब आपने मुझे भाई का दर्जा दिया है तो भाई का इतना काम तो करना ही पड़ेगा”

ज्ञानचंद “लेकिन आप वहाँ जा तो रहे हो”

व्यापारी “आप समझे नहीं यदि यह धन मैं आपको देकर अभी अपने गाँव चला जाऊँ तो कल पूरे दिन व्यापार कर सकूंगा और वैसे भी आप पर क्या वहम करना ? आप तो अपने हैं।”

इतना सुनते ही चोरों को यह अवसर ‘सोने में सुहागा’ सा प्रतीत हुआ और तुरंत हामी भर दी।

व्यापारी ने अपनी चाल के मुताबिक उनसे छुटकारा पाने के लिए एक थैली जिसमें बैर की गुठलियां थी जो किसी किसान नें खेती के लिए मंगवाए थे को चोरों के हाथों में देकर सेठ के हाथों गठरी खुलवाने का निवेदन करते हुए अपनी बैलगाड़ी को वापस दौड़ा दी।

 

संजय डारा बिश्नोई पता सांचौर जालोर राजस्थान

 

Conclusion

 

दोस्तों हमेशा याद रखना विपदा के समय पर हमेशा से ही बुद्धि से काम लेना चाहिए। बल से नहीं, हाँ ऐसा भी है की आपको देखना पड़ेगा की उस विपदा में बच कैसे सकते हैं बुद्धि से या बल से !

अगर आपके सामने शत्रु बहुत ही बलशाली है तो आपको बुद्धि से काम लेना चाहिए और अगर देखा की आपके सामने शत्रु कमजोर है फिर भी अगर आप बुद्धि से वहां से निकल सकते हैं तो क्या जरुरत की आप बल का प्रयोग करो।

मुझे उम्मीद है की आपको आज का संजय द्वारा लिखी गयी यह Short Moral Story in Hindi अच्छी लगी होगी।

और आपको समझ में आ गया होगा सब कुछ।

दोस्तों अगर आपके मन में कोई भी सवाल या सुझाव है तो मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताये।

 

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

Wish You All The Very Best.

 

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