Start With Why Book Summary in Hindi – क्यों से क्यों शुरुवात करें ?

Start With Why Book Summary in Hindi – Hello दोस्तों, आज मैं आपको बताऊंगा Simon Sinek की किताब Start With Why की बुक समरी, अगर आपको जिंदगी अच्छे से जीना है, Leader बनना है तो इस बुक से सीखना होगा, तो ये बुक समरी ध्यान से पढ़े और इस बुक को पूरा पढ़े।

 

Start With Why Book Summary in Hindi

 

परिचय – ज़रा खुद पे नज़र डालो

 

  1. आप किस ब्रांड के कपडे पहनते हो ?
  2. किस तरह के जूते या बैग लेते हो ?
  3. आप क्या नाश्ता करते हो ?
  4. आज सुबह आपने किस शैम्पू से बाल धोये ?
  5. सबसे ज़रूरी बात कि आप ये सब प्रोडक्ट्स क्यों लेते हो ?

 

आप शायद बोलेंगे कि सस्ता या अच्छी क्वालिटी का होने की वजह से आप कोई प्रोडक्ट इस्तेमाल करना पसंद करते है। लेकिन क्या आपको पता है कि आपके कपड़ो और जूतों से ही आपकी पहचान होती है।

आपकी लाइफ स्टाइल आपकी पर्सनेलिटी सब कुछ आपके पहनावे से झलकता है। इसलिए जो कुछ भी आप इस्तेमाल करते है उसके पीछे एक ख़ास वजह होती है।

लोग वो नहीं खरीदते जो आप बनाते है बल्कि आप क्यों बनाते है सिर्फ इस पर वो ध्यान देते है “People don’t buy what you do, they buy why you do it.”

एप्पल कहता है – “कुछ अलग सोचो”

 

एप्पल के सारे प्रोडक्ट्स के पीछे सिर्फ यही सोच है। एप्पल की कंपनी ने 1984 से अपना स्लोगन चेंज नहीं किया क्यूंकि यही बात एप्पल को सक्सेसफुल बनाती है।

क्योंकि उनके पास एक क्लियर “Why” है यानि एक क्लियर reason है। इसका मतलब कि कंपनी का पर्पज एकदम क्लियर है। इसलिए तो एप्पल अभी तक चल रहा है और सक्सेसफुल चल रहा है। ये लोगो को कुछ अलग सोचने के लिए inspire करता है।

 

  1. क्या आपके पास भी ऐसा क्लियर Why का सेन्स है ?
  2. क्या आपका भी कोई पर्पज है जिसे लेकर आप अपने सारे काम करते है ?

 

सक्सेसफुल होने के लिए आपको इसी Why से स्टार्ट करना पड़ेगा। अगर आपको एक अच्छा लीडर बनना है तो आपको एक ‘Why’ से स्टार्ट करने की ज़रुरत पड़ेगी।

 

 

मेनीपुलेशन Vs इन्स्पाइरेशन

 

जितने भी ग्रेट लीडर्स आप जानते है उनके बारे में ज़रा सोचिये। उन्हें देख के ऐसा क्यों लगता है कि जैसे वो पैदा ही लीडर बनने के लिए हुए है ?

शुक्र है कि एक तरीका है जिससे हम उनके जैसे बन सकते है। उनके सोचने, काम करने और बात करने के तरीके में एक पैटर्न है और हमें वही पैटर्न सीखना है।

 

फिर हम सीख सकते है कि लीडर कैसे बना जाए ?

 

मार्टिन लूथर किंग एक ग्रेट लीडर हुआ जिसने लाखो लोगो को इंस्पायर किया था। उनकी स्पीच सुनने के लिए अगस्त 28,1963 में हज़ारो लोगो ने वाशिंगटन डी.सी. तक पैदल चल कर आये।

इस स्पीच के लिए किसी को कोई इनविटेशन नहीं भेजा गया था फिर भी बड़ी तादाद में लोग आते जा रहे थे। वहां हर जाति, हर रंग के लोग मौजूद थे।

किंग ने अपने पॉवरफुल वर्ड्स में कहा ”मेरा एक सपना है”. सब उनकी स्पीच सुनकर इतने इंस्पायर हुए कि इक्वल राइट्स के लिए लड़ने को तैयार हो गए, और उन सबकी कोशिश रंग लायी जिसने अमेरिका का इतिहास ही बदल कर रख दिया था।

ऐसा नहीं है कि सभी लीडर्स हमें इंस्पायर करे। कई ऐसे भी लीडर हुए है जिनको लोग डर और पनिशमेंट की वजह से follow करते थे या फिर किसी लालच की वजह से।

पर सच्चे लीडर तो स्पेशल होते है। उनमे कोई तो खास बात होती है जिसे हर कोई नक़ल नहीं कर सकता, और उनकी खूबी की वजह से ही उनके लाखो follower होते है।

 

 

आप कैसे दुसरो से काम करवा सकते है ?

 

इसके दो तरीके है –

 

  1. या तो आप उन्हें manipulate करे,
  2. या उन्हें inspire करे.

 

अक्सर पोलिटिकल और बिजनेस लीडर लोगो को manipulate ही करते है।

वोट के लिए नेता डर का माहौल तक क्रियेट कर सकते है। झूठे वादे करके और दबाव डालकर वोट हासिल करने के लिए ऐसे नेता कुछ भी कर सकते है।

 

जैसे कई बार सेल्स बढ़ाने के लिए कंपनी अपने price कम कर देती है, नए प्रोडक्ट्स निकालती है और प्रोमोस देती है।

 

चलिए, मोटोरोला के Razr model को ही ले लेते है। ये फ्लिप टॉप मोबाइल फोन 2004 में रिलीज़ हुआ था जिसके 50 मिलियन सेट मोटोरोला ने बेचे।

 

कई होल्लीवुड सेलेब्रिटीज़ और प्राइम मिनिस्टर ने भी ये मोबाइल खरीदा था। कुल मिलाकर मोटोरोला का ये प्रोडक्ट बहुत सक्सेसफुल रहा था। हालांकि 4 साल में ही कई कंपनीज ने कॉम्पीटीशन में Razr के ही वर्ज़न निकाल दिए थे।

 

उन्होंने नए फ़ोन रिलीज़ किये जिसमें Razr से भी बढ़िया फीचेर्स थे। ज़ाहिर बात है कि अब मोटोरोला का मार्किट ठंडा पड़ गया था। RAZR बस एक नोवेल्टी प्रोडक्ट था। ये कोई इन्नोवेशन नहीं थी।

 

फैक्स मशीन, माइक्रोवेव अवन, लाईट ब्लब और आई ट्युन्स को सही मायने में इनोवेशन कहा जाएगा। ये वो प्रोडक्ट्स है जिन्होंने पूरी इंडस्ट्री ही चेंज कर दी है। या यूँ कह ले कि सोसाइटी ही चेंज कर दी है।

नोवेल्टी कोई इनोवेशन नहीं होती बस एक तरह का मेंनीप्यूलेशन है। बेशक मोटोरोला ने RAZR को लाखो लोगो को बेचा मगर सिर्फ शोर्ट टर्म के लिए।

जिन्होंने ये प्रोडक्ट खरीदा अब ज़रूरी नहीं कि आगे भी सारे मोटोरोला के प्रोडक्ट ही खरीदेगे। क्योंकि कंपनी के लिए उनकी कोई Loyalty नहीं है।

Manipulation क्रियेट करना बहुत Ineffective है। प्राइस गिरा दो, प्रोमोशन करो और incentives दो, ये सब बहुत खर्चे का काम है।
फिर भी इसका इफ़ेक्ट बस कुछ ही टाइम तक रहता है। इसलिए मेनीप्युलेशन करके अपना काम निकलवाना किसी भी कंपनी और ओर्गेनाइजेशन को कमज़ोर कर देता है।

 

 

द गोल्डन सर्कल

 

जो सच्चे लीडर होते है, वो कभी मेंनिप्युलेशन नहीं करते। वे INSPIRE करते है।

यहाँ हम आपको एक इफेक्टिव तरीका बता रहे है जिससे आप भी ग्रेट लीडर्स की तरह लोगो को INSPIRE कर पाएंगे। इस कोंसेप्ट को गोल्डन सर्कल कहा जाता है।

ये गोल्डन सर्कल Human Behavior के पैटर्न को Explain करता है। इससे हम अपने एक्शन के पीछे की वजह समझ सकते है,
और ये हमारे लिए हमेशा एक स्ट्रोंग रीमाइंडर की तरह काम करता है कि कुछ भी शुरू करने से पहले हम खुद से पूछे – “क्यों”???

 

  1. हम ये क्यों कर रहे है ?
  2. क्यों बाइक Riders अपनी बॉडी में Harley Davidson के logo का टेटू बनवाकर घूम रहे होते है ?
  3. क्या आपने कभी सोचा है, एप्पल इतना कैसे ट्रांसफॉर्म हो गया ?

 

सबसे पहले उन्होंने कंप्यूटर बनाये फिर गेजेट्स और मोबाइल फोन बेचने शुरू कर दिया। उनका पर्पज क्लियर था इसीलिए हार्ले डेविडसन और एप्पल दोनों सक्सेसफुल है। दोनों कम्पनियों ने “Why” की सोच के साथ अपनी शुरुवात की।

अब हम इस गोल्डन सर्कल को लेते है। इसमें लिखा वर्ड “What” यानि क्या उस सर्विस या प्रोडक्ट को रेफेर करता है जो कम्पनी ऑफर कर रही है।

ये समझना बहुत आसान है किसी भी एम्प्लोयी या कस्टमर से पूछ लीजिये। सबको पता होता है कि कंपनी क्या ऑफर कर रही है…

 

अब दूसरा वर्ड आता है “How” यानि कैसे….. मतलब इस बात को समझना मुश्किल है कि “कैसे” कोई कंपनी अपने कोम्प्टीटर्स से अलग है।

एक तरह से बोले तो बाकियों से कैसे बेहतर है ? ये “How” उस “What” के पीछे का प्रोसेस है जो कंपनी करती है, और “How” उस कंपनी के डिसीजन मेकिंग को रेफेर करता है।

 

किसी भी कंपनी का पर्पज़ या “Why” सिर्फ प्रॉफिट कमाना नहीं है। प्रॉफिट तो बस एक रिजल्ट है।

“Why” रेफेर करता है उस बीलीफ को, उस कॉज को या उस पर्पज को जो कंपनी लेकर चलती है।

 

  1. क्यों वो कंपनी शुरू हुई थी ?
  2. आखिर क्या वजह थी उसके पीछे ?
  3. क्यों उस कंपनी के एम्प्लोयीज़ काम करने के लिए मोटिवेट होते है ?
  4. कस्टमर क्यों उस कंपनी का प्रोडक्ट खरीदे ?

 

ज़्यादातर कंपनीज़ बाहर से अन्दर की तरफ कम्युनिकेट करती है। उन्हें क्लियर पता होता है कि वे क्या कर रही है। मगर जब वे इस गोल्डन सर्कल में गहराई से चली जाती है तो ये थोडा फजी हो जाता है। उनमे से ज़्यादातर ये एक्सप्लेन नहीं कर पाती कि वे कैसे काम कर रही है।

एक तरह से उन्हें पता ही नहीं होता कि कंपनी की शुरुवात आखिर किसलिए की गई थी। कंपनी का मेन पर्पज़ क्या है इस बारे में उन्हें कुछ पता नहीं होता है।

यही बात इंडीविज्युएल के साथ भी है और लीडर के साथ भी है। सिर्फ वही कंपनी, लीडर और लोग सक्सेसफुल हो पाते है जिन्हें इस “Why” के बारे में पता होता है।

दुसरो को इंस्पायर करने के लिए आपको पहले खुद के लिए एक पर्पज़ ढूंढना पड़ेगा।

 

एप्पल Inc. एक ऐसी कंपनी है जो इनोवेशन करती है। अपने आई-पोड और आई- ट्युन्स से इसने म्यूजिक इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया था और आई-फोन लांच करके मोबाइल फोन की दुनिया में रेवोल्यूशन ला दिया।

अगर एप्पल भी कोई आम कंपनी होती तो ये भी अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग “What” से करती और कहती – हम बढ़िया कंप्यूटर बनाते है, जो देखने में सुन्दर है, सिंपल है और यूजर फ्रेंडली है, क्या आप खरीदना चाहेंगे ?

ये तो टीपिकल सेल्स पिच है जो सब करते है मगर नहीं, एप्पल ने इसे सबकी तरह नहीं किया। कंपनी इनसाइड आउट से शुरू हुई। ये एप्पल के कम्युनिकेट का तरीका था।

उनके लिए “वाय” हमेशा सबसे पहले आता है। जो भी हम करते है उसमे स्टेटस क्यू बदलने की कोशिश करते है क्योंकि हम औरो से अलग सोचते हैं।

इसलिए तो एप्पल बाकी के कॉम्पटीटर्स से सबसे आगे है। ये क्लियर है कि एप्पल का “Why” यानि पर्पज यही है कि वो स्टेटस क्यू को चेलेंज करना चाहता है और कुछ हटकर सोचना चाहता है।

उनके एडवरटीज़मेंट में भी यही बात साफ़ होती है, और यही वजह है कि एक स्ट्रोंग पर्पज़ को लेकर चलने वाली एप्पल कंपनी हमेशा क्वालिटी के प्रोडक्ट्स बनाती है।

हालत ये है कि कंपनी को सिर्फ कस्टमर्स की ही नहीं बल्कि अपने एम्प्लोयीज़ की भी लोयलिटी मिली है। ये भी एक रीजन है कि एप्पल ने

कम्प्यूटर के अलावा इतने एमपी3 और मोबाइल फ़ोन भी बेचे है।

इस सबके सेंटर में एप्पल का “Why” यानि उसका पर्पज ही है जो काम कर रहा है।

 

क्या आपको ये बात मालूम है कि असल में एमपी3 एप्पल ने नहीं बनाया था ?

 

इसे क्रिएटिव टेक्नोलोजी लिमिटेड सिंगापोर ने बनाया था। लेकिन फिर एप्पल ने कैसे इसका मार्किट कब्ज़े में ले लिया ?

क्रिएटिव ने ये प्रोडक्ट “5जीबी एमपी 3 प्लेयर” के रूप में एडवरटीज़ किया था।

 

मगर एप्पल ने कहा “आई-पोड आपकी जेब में 1,000 गाने है”.

क्रिएटिव ने मार्किट को बताया कि प्रोडक्ट “क्या” है पर एप्पल ने मार्किट को बताया कि ‘क्यों” कस्टमर को आई-पोड खरीदने की ज़रुरत है।

याद रखिये लोग ये नहीं देखते कि आपके पास “क्या” है, वो देखते है कि आपके पास “क्यों” है।

 

क्या आप जानते है कि Dell ने अपना खुद का एमपी3 प्लेयर 2003 में निकाला था। मगर ये उतना सक्सेसफुल नहीं हुआ क्योंकि सबको पता था कि Dell कंप्यूटर बनाती है, और डेल से कोई एमपी3 या मोबाइल खरीदना सही आइडीया नहीं लगता। कुछ सालो बाद डेल ने डीसाइड किया कि वे अपने कोर बिजनेस में ही फोकस करेंगे।

 

वही दूसरी तरफ हमें पता है कि एप्पल एक ऐसी कंपनी है जो औरो से हटकर सोचती है। एप्पल इनोवेशन करती है।

ये अपने प्रोडक्ट से इंडस्ट्री बदल देती है। मतलब जो चला आ रहा है उसमे ये बदलाव कर देती है। एक तरह से ये नार्मल को चेलेंज करती है, और अपने कस्टमर को यूज़र फ्रेंडली प्रोडक्ट देती है।

हम जानते है कि “Why” की सोच लेकर एप्पल काम करती है ना कि ‘What” के साथ। जब एप्पल बनी तो इसका लीगल नाम था एप्पल कंप्यूटर्स इंक।

लेकिन कंपनी ने 2007 में अपना नाम बदल के सिर्फ एप्पल इंक कर लिया था। क्योंकि एप्पल कंप्यूटर बनाने वाली कंपनी से कहीं बढ़कर थी।

कुछ अलग सोचने की सीख सबसे पहले एप्पल ने दी थी। ये उनका पर्पज़ था। उनका ये “Why” हमेशा रहेगा चाहे “What” कुछ भी हो।

एप्पल ने वो कर दिखाया जो एचपी और डेल नहीं कर पाए।

एप्पल ने आई-पोड बनाकर छोटी इलेक्ट्रोनिक इंडस्ट्री में कदम रखा। इसका कोम्प्टीशन सोनी और फिलिप्स के साथ था।

एप्पल ने मोबाइल फोन्स का ट्रेंड ही चेंज कर दिया था। एप्पल के आई-फोन की वजह से ही नोकिया, मोटोरोला और एरिक्सन ने भी अपने टच स्क्रीन वाले डिवाइस निकाले।

HP और Dell ने भी कोशिश की मगर चले नहीं तो फिर अपने कंप्यूटर बनाने तक ही रहे।

 

⇒PART – 2 भी पढ़े

 

 

Conclusion

 

तो दोस्तों देखा आपने कि Why, What और How क्लियर होना कितना important है ?

ये सिर्फ बिज़नेस में ही नहीं ये हमारी पर्सनल लाइफ में भी उतना ही इम्पोर्टेन्ट है।

आज आपने क्या सीखा ?

क्या आप भी एक बिजनेसमैन बनना चाहते हैं ?

आपको आज का यह Start With Why बुक समरी कैसा लगा ?

अगर आपके मन कोई भी सवाल या सुझाव है तो मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताये।

 

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

Wish You All The Very Best.

 

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