The Art of Public Speaking Book Summary in Hindi | एक बेहतरीन पब्लिक स्पीकर कैसे बने

The Art of Public Speaking Book Summary in Hindi – द आर्ट आफ पब्लिक स्पीकिंग (The Art of Public Speaking) में आज हम जानेंगे कि किस तरह से आप पब्लिक स्पीकिंग की कला में माहिर बन सकते हैं।

यह किताब हमें बताती है कि किस तरह से आप अपने स्टेज के डर से आज़ाद हो सकते हैं और किन तरीकों का इस्तेमाल कर के आप बहुत सारे लोगों को अपने विचारों से प्रभावित कर सकते हैं।

अगर आप एक बेहतर पब्लिक स्पीकर बनना चाहते हैं, या लोगों को प्रभावित करने के तरीके सीखना चाहते हैं, या फिर एक अच्छे लीडर बनना चाहते हैं तो किताब सिर्फ आपके लिए ही है।

लेखक

डेल कार्नेजी (Dale Carnegie) अमेरिका के एक लेखक और लेक्चरर थे। वे लोगों को सिखाते थे कि किस तरह से वे खुद में सुधार कर सकते हैं, किस तरह से वे कुछ बेच सकते हैं और कैसे वे बोलने की कला में माहिर बन सकते हैं। आज 100 साल के बाद भी लोग उनकी किताबों को बहुत पसंद करते हैं।

जोसेफ बर्ग एसेनवीन (J.B. Esenwein) अमेरिका के एक एडिटर, लेक्चरर और लेखक थे। उन्होंने दुनिया के सबसे बेहतरीन लिट्रेचर की लाइब्रेरी में अपना योगदान दिया था, जिसके लिए वे जाने जाते हैं।

The Art of Public Speaking Book Summary in Hindi

यह किताब आपको क्यों पढ़नी चाहिए

आज के वक्त में दुनिए को लीडर्स की बहुत ज्यादा जरूरत है। हमें वो लोग चाहिए जो हमारे समाज को पहले से बेहतर बनाने के लिए काम कर सकें। हमें वो लोग चाहिए जो एक बेहतर बिजनेस खड़ा कर के अच्छे प्रोडक्ट मार्केट में ला सकें जिससे लोगों का फायदा हो। लेकिन यह सब कर पाने के लिए उन्हें एक कला में माहिर बनना होगा पब्लिक स्पीकिंग।

दुनिया के किसी भी कामयाब व्यक्ति को ले लीजिए, उसमें यह ताकत होती है कि वो बहुत से लोगों को एक साथ प्रभावित कर सकता है। लेकिन बहुत से लोग स्टेज के नाम से ही काँपने लगते हैं। कामयाब तो हर कोई बनना चाहता है, लेकिन यह वो डर है जिससे लड़ने जाने पर बड़े से बड़ा आदमी एक बार जरूर घबराता है।

यह किताब आपके इस डर का समाधान है। यह आपको बताती है कि किस तरह से आप पब्लिक स्पीकिंग की कला में माहिर बन सकते हैं।

अगर आपको जानना है कि किस तरह से आप पब्लिक स्पीकिंग सीख सकते हैं, या किस तरह से आप गले और फेफड़े की कसरत कर के अपनी आवाज को बेहतर बना सकते हैं, या फिर अगर आप जानना चाहते हैं कि अपने सुनने वालों को एक भीड़ में इकट्ठा करना क्यों जरूरी है तो ये बुक समरी आगे पढ़ते रहिये।

एक बेहतर पब्लिक स्पीकर बनने के लिए आपको खुद के बारे में ना सोचकर अपने टापिक के बारे में सोचना होगा।

हम सभी लोग गाड़ी चलाना किताब पढ़कर नहीं सीखते। अगर किसी भी व्यक्ति को गाड़ी चलाना सीखना होता है, तो वो उसे चलाकर सीखता है और लगभग हर कोई उस पर से ना एक बार जरूर गिरता है।

ठीक उसी तरह से अगर आपको पब्लिक स्पीकिंग सीखना है तो आपको लोगों के सामने जाकर बोलना होगा। शुरुआत में आप से गलतियां जरूर होंगी, लेकिन वो सभी के साथ होती हैं। उन्हीं गलतियों से आप बेहतर तरीके से बोलना सीखते हैं।

दुनिया के महान पब्लिक स्पीकर्स भी जब पहली बार स्टेज पर गए थे तो उन्हें घबराहट हुई थी। लेकिन पब्लिक स्पीकर बनने का मतलब यह नहीं होता कि आपको डर ही ना लगे। इसका मतलब होता है कि आपको उस डर को काबू करना आना चाहिए। अब आप सोच रहे होंगे कि किस तरह से आप अपने डर से आज़ाद हो सकते हैं? इसके लिए आप तीन तरीके अपना सकते हैं।

सबसे पहले तो अपने बारे में सोचना छोड़ कर अपने दिए गए टापिक के बारे में सोचिए। बहुत से लोग स्टेज पर जाते ही सोचने लगते हैं कि लोग उनके बारे में क्या सोच रहे हैं या फिर कहीं वे देखने में कुछ खराब तो नहीं लग रहे। आप यह सब ना सोचकर अपने मैसेज पर ध्यान दीजिए जो आप लोगों तक पहुंचाने के लिए आए हैं।

इसके बाद अपनी बात को पहले से ही तैयार कर के जाइए। बहुत से लोग बिना तैयारी किए स्टेज पर चले जाते हैं और वहाँ जाकर यह भूल जाते हैं कि उन्हें बोलना क्या था। इस तरह से वे और घबराने लगते हैं। इसलिए हमेशा अपनी स्पीच को याद और प्रेक्टिस कर के जाइए।

इसके बाद अंत में जब आप बोलने के लिए जाइए तो यह उम्मीद कीजिए कि आप असल में बोलने में कामयाब होंगे। अपनी विनम्रता को बनाए रखिए। अपने डर को बगल में रख कर एक खुले दिमाग के साथ बोलिए। शुरुआत में सभी खराब करते हैं, लेकिन कुछ वक्त तक प्रैक्टिस कर लेने के •बाद सारे ही लोग अच्छा बोलने लगते हैं।

एक टोन में ना बोलकर अपनी बात के जरुरी शब्दों पर जोर दीजिए।

गाने सुनते वक्त आपने यह देखा होगा कि उसमें अलग अलग धुन का इस्तेमाल होता है। जरा सोचिए आपका मनपसंद गाना सुनने में कैसा लगता अगर उसमें सिर्फ एक तरह का धुन बजता और गाने वाला सिर्फ एक टोन में गाए जाता?

कोई भी चीज अगर पूरी तरह से सिर्फ एक खूबी को दिखाए तो वो खूबसूरत नहीं लगती। सोचिए अगर दुनिया सिर्फ एक ही रंग में रंगी होती तो कैसा लगतार आपके आस पास हर जगह सब कुछ सफेद रंग का हो जाए तो कैसा लगेगार

यहाँ पर कहने का मतलब यह है कि बोलते वक्त कभी इस तरह से मत बोलिए कि सुनने वाले को लगे आप रद कर कुछ बोल रहे हैं। अपने टोन को जरूरत के हिसाब से बदलते रहिए और अपने वाक्य के जरूरी हिस्सों पर और देकर बोलिए।

एक्जाम्पल के लिए अगर आपको कहना है कामयाब आपकी किस्मत का नहीं, बल्कि आपके कर्मों का नतीजा तो यहाँ पर आप इस वाक्य के कुछ जरूरी शब्दों को पहचानिए, जैसे कामयाबी किस्मत, कर्मों और नतीजा अब आप इन जरुरी शब्दों को थोड़ा सा जोर देकर बोलिए ताकि ये शब्द सुनने में बाकी के शब्दों से अलग लगे।

लेकिन जोर देकर बोलने का मतलब यह नहीं है कि आप उसे चिल्ला कर कहें। इसका मतलब है उसे कुछ अलग तरह से कहना ताकि सुनने वाला यह समझ जाए कि वो शब्द वाक्य के जरूरी शब्द है। अगर आप जोर से बोल रहे थे, तो उन जरुरी शब्दों को आराम से कहिए।

अगर आप आराम से बोल रहे थे तो उन शब्दों को जोर से कहिए। या फिर आप उसे अपने स्टाइल में कुछ अलग तरह से कहने की कोशिश कीजिए ताकि वो बाकी के शब्दों से अलग लगे।

अपनी बात के जरूरी हिस्से को अलग तरह से बोलने के तीन तरीके हो सकते हैं। सबसे पहला है अपने स्पिच को बदलना, दूसरा है अपने बोलने की रफ्तार को बदलना और तीसरा है कुछ देर तक रुक कर बोलना।

जब हम कुछ मजेदार बात बता रहे होते हैं तो हम तेज बोलते हैं और जब कुछ खूबसूरत लम्हों की बात करते हैं तो आराम से बोलते हैं। इससे हमारे टोन अलग हो जाते हैं।

इसके बाद अगर आप अपनी जरूरी बात को बोलने से ठीक पहले या ठीक बाद कुछ देर के लिए रुक जाएंगे तो वह बात बाकी की बातों से अलग लगेगी या फिर अगर आप अपने वाक्य की शुरुआत तेज रफ्तार में बोलते हुए करेंगे और उसके अंत में उसे धीरे बोलेंगे तो वो भी सुनने में अलग लगेगा। इस तरह से आप अपनी स्पीच को आकर्षक बना सकते हैं।

अपनी बात के जरिए अपने लोगों में भावनाएं पैदा करने वाला व्यक्ति बहुत अच्छा स्पीकर होता है।

इंसान हमेशा अपनी भावनाओं के आगे मजबूर हो जाता है। यही वो चीज़ है जो हमारी जिन्दगी में रंग डालती है और इसे खूबसूरत बनाती है। अगर आप किसी तरह से अपने सुनने वालों के अंदर एक भावना पैदा कर सकें, तो वे आपको बहुत पसंद करने लगेंगे। लोग इसीलिए कामेडी शो ज्यादा देखने जाते हैं और एक डाक्यूमेंट्री कम देखते हैं क्योंकि कामेडी में एक भावना को पैदा करती है खुशी।

सिर्फ यही नहीं, सेल्स में भी जब हम ग्राहक की भावनाओं पर ज्यादा ध्यान देते हैं तो हम अपने प्रोडक्ट को आसानी से बेच पाते हैं। लोग नया आईफोन इसलिए नहीं खरीदते क्योंकि वो अच्छा है। आईफोन ऐसा कोई भी फीचर नहीं देता जो सैमसंग या ओप्पो या वीवो नहीं देते।

लेकिन अगर आपके सामने आईफोन और दूसरे स्मार्टफोन्स रख दिए जाएं, तो संभावना ज्यादा है कि आप आईफोन को चुनेंगे। क्यों? क्योंकि लोगों को लगता है कि उसे इस्तेमाल करने से उनका दर्जा उठ जाता है।

भावनाएं हमारी जिन्दगी को चलाती हैं। इसलिए अगर आप किसी तरह से भावनाओं पर काबू पा लें तो आप लोगों के दिलों पर काबू पा सकते हैं।

किस तरह से आप लोगों में भावना पैदा कर सकते हैं? आसान शब्दों में, प्रैक्टिस कर के आप जिस भी टापिक पर बोल रहे हैं, आपको उसके अंदर पूरी तरह से घुसना होगा। उसे अपनी आत्मा में बसा लीजिए और उसमें पूरी तरह से उतर जाइए।

जब एक्टर्स अपने रोल की तैयारी करते हैं तो वे उसमें भावनाएं पैदा करने के लिए पूरी तरह से कैरेक्टर में उतर जाते हैं। शूटिंग से कुछ घंटे पहले से ही वे खुद को एक कमरे में बंद कर लेते हैं और सिर्फ एक सीन के लिए प्रैक्टिस करते रहते हैं। इस तरह से वे देखने वालों के अंदर भावनाएं पैदा कर पाते हैं और उनका दिल जीत पाते हैं। अगर आपको भी ऐसा करना है, तो आपको भी अपने टापिक को अच्छे से तैयार करना होगा।

बोलने के साथ ही आपको अपने गेस्चर पर भी ध्यान देना होगा।

गेस्चर का मतलब होता है बोलते वक्त अपने हाथ और अपने शरीर को अपनी स्पीच के हिसाब से हिलाना। यह यो इशारे होते हैं जिसे देखकर लोग आपकी बात को अच्छे से समझ पाते हैं। इसमें माहिर बनने के लिए भी आपको प्रैक्टिस की जरूरत होगी।

सबसे पहले तो इन्हें जबरदस्ती बाहर लाने की कोशिश मत कीजिए। गेस्चर आपके अंदर से अपने आप निकलने चाहिए और अगर आप जबरदस्ती इसे बाहर निकालने की कोशिश करेंगे तो लोगों को तुरंत पता लग जाएगा कि वो नकली है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप उसे प्रेक्टिस नहीं कर सकते।

गेस्चर को बेहतर बनाने के लिए आप उसे बार बार प्रैक्टिस कर सकते हैं। यह जरूरी नहीं है कि आप हर एक गेस्चर को एक ही तरीके से प्रैक्टिस करें और हर बार उसे उसी तरह से इस्तेमाल करें। कभी कभी यह संभव भी नहीं होता। यह आपके अंदर से समय समय पर अपने आप निकलने चाहिए। आप अगर एक होनहार स्पीकर को एक ही स्पीच दो बार देते हुए सुनिए तो आप यह देखेंगे कि उनके गेस्वर बदलते रहते हैं।

इसके बाद आपको यह ध्यान देना होगा कि आपके अंदर से जो गेस्चर निकल रहे हैं वो आपकी स्पीच और आपके टोन के साथ मैच खा रहे हैं या नहीं। बहुत बार हम ऐसे गेस्चर कर देते हैं जो कि बहुत खराब लगते हैं। इसके लिए आप शीशे में देखकर उसे प्रैक्टिस कर सकते हैं।

आप यह देखिए कि कौन से गेस्चर अच्छे लग रहे हैं, किसे सुधारा जा सकता है और किसे आपको निकालने की जरूरत है। समय के साथ आपको इसकी आदत पड़ जाएगी और आप इसे बेहतर तरीके से कर पाएंगे।

यहाँ पर सबसे जरूरी बात यह है कि वे गेस्चर आपके अंदर से प्राकृतिक रूप से निकलने चाहिए नकली गेस्चर का इस्तेमाल करना बिल्कुल वैसा ही है जैसे अपने बगीचे के सूखे हुए पौधों को हरे रंग से रंग देना। आप इसकी जितनी ज्यादा प्रैक्टिस करेंगे, आपके लिए यह उतना आसान हो जाएगा।

इसके अलावा बहुत ज्यादा गेस्चर करने से लोगों का ध्यान भटकने लगता है। यह याद रखिए कि आप अपने हाथों को या अपने शरीर को हद से ज्यादा मत हिलाइए। साथ ही अपने चेहरे के हाव भाव पर भी ध्यान दीजिए।

Conclusion

हर कला की तरह, पब्लिक स्पीकिंग की कला को भी प्रैक्टिस कर के सीखा जा सकता है। स्टेज पर जाने से पहले अपने टापिक को अच्छे से तैयार कीजिए और साथ ही अपनी सेहत का अच्छा खयाल रखिए ताकी आप लम्बे समय तक अच्छे से बोल सकें। अपनी बात के जरिए लोगों में भावनाएं पैदा करने की कोशिश कीजिए। हर रोज अच्छे से प्रैक्टिस कर के आप इसमें बेहतर बन सकते हैं।

क्या करें ?

अपने शब्दों के ज्ञान को बढ़ाइए।

अगर आपके पास इस्तेमाल करने के लिए बहुत सारे शब्द होंगे, तो आपकी स्पीच पहले से बेहतर होगी। इससे आप अपने विचारों को बेहतर तरीके से समझा पाएंगे। इसलिए अब से अगर आप कोई किताब पढ़ें, तो उसमें आने वाले उन शब्दों को नोट कर लीजिए जो आपके लिए नए हैं और फिर उन्हें अपनी स्पीच में इस्तेमाल कीजिए।

तो दोस्तों आपको आज का यह The Art of Public Speaking Book Summary in Hindi कैसा लगा ?

दोस्तों क्या आपको भी सपना है एक बेहतरीन पब्लिक स्पीकर बनना है ?

अगर आपके मन में कुछ सवाल या सुझाव है तो मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताये।

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

Wish You All The Very Best.

सम्बंधित लेख –

  1. A Brief History of Everyone Who Lived Book Summary in Hindi
  2. 13 Things Mentally Strong People Don’t Do Book Summary in Hindi – ये 13 आदतें जानिए
  3. Become Attached Book Summary in Hindi – जिंदगी के पहले रिश्ते का असर
  4. Anger Management For Dummies Book Summary in Hindi – गुस्सा और तनाव से मुक्ति
  5. A/B Testing Book Summary in Hindi – अगर आप एक डिजिटल आन्त्रप्रिन्योर हैं तो ये बुक पढ़ें!
  6. Getting to Yes Book Summary in Hindi – बिज़नेस में मोलभाव एक्सपर्ट बनने का तरीका
  7. Body Kindness Book Summary in Hindi – क्या आप एकदम सेहतमंद रहना चाहते हैं ?
  8. Breakfast With Socrates Book Summary in Hindi – क्या आपको जिंदगी के हर छोटे-बड़े सवालों का जवाब चाहिए ?
  9. Activate Your Brain Book Summary in Hindi – अपने दिमाग को पॉवरफुल बनाने का तरीका
  10. 10% Happier Book Summary in Hindi – ध्यान के बारे में Detail में जानिए
  11. A Guide to the Good Life Book Summary in Hindi – जीवन में ख़ुशी को कैसे हासिल करें?

Leave a Comment