Total Recall Book Summary in Hindi – अर्नाल्ड Schwarzenegger की जीवन की कहानी

Total Recall Book Summary in Hindi – 2013 में आई यह किताब टोटल रिकॉल अर्नाल्ड श्वार्जनेगर के जीवन के सारे उतार चढ़ाव से हमें मुखातिब करवाती है। उनके संघर्ष भरे बचपन से ले कर उनके महान बनने तक के सफर को इस किताब में प्रदर्शित किया गया है। इस किताब में हम पढ़ेंगे कि आखिर कैसे उन्होंने बॉलीवुड और अमेरिका की राजनीति में नाम कमाया।

 
 

Table of Contents

यह किसके लिए है?

  • उन व्यक्तियों के लिए जोकि खुद के अंदर बदलाव लाना चाहते हैं।
  • अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर के फैंस के लिए।
  • उन व्यक्तियों के लिए जो किसी सफल व्यक्ति के जीवन से प्रेरणा लेना चाहते हैं।
 
 

लेखक के बारे में –

 
 लेखक अर्नाल्ड कैलिफोर्निया के गवर्नर रह चुके हैं। इसके अलावा वो हॉलीवुड के सबसे बड़े सितारों में से एक हैं और साथ ही साथ बॉडी बिल्डिंग के बेताज बादशाह भी हैं।
 
 

यह किताब आपको क्यों पढ़नी चाहिए

 
आजकल पहले जैसा माहौल नहीं है क्योंकि पहले के समय में लोग एक ही कम्पनी में काम करते करते अपना पूरा जीवन व्यतीत कर देते थे। आजकल फ्लेक्सिबिलिटी की इम्पोर्टेंस बहुत बढ़ गयी है। तो फिर अगर आप भी अपने जीवन में कुछ बदलाव के बारे में सोच रहे हैं तो क्यों न आप उस इंसान से एडवाइस लें जो तीन डिपार्टमेंट में सबसे ऊंची पोस्ट तक पहुंच चुका है।
 
अर्नाल्ड की डेटर्मिनेर इंसान हैं। युद्ध के बाद ऑस्ट्रिया से निकलकर, अमेरिका में अपने विनम्र स्वभाव के कारण मिस्टर यूनिवर्स की उपाधि मिलना, उसके बाद बॉलीवुड में नाम कमाना और अंत में कैलिफोर्निया के गवर्नर के रूप में उन्होंने साबित किया कि उनका जीवन सभी के लिए सीखने के योग्य है।
 
तो हम लोग अर्नाल्ड से आत्म-अनुशासन, एम्बिशन और सफलता के बारे में क्या सीखते हैं?
 
तो आइए सीखते हैं कि आखिर किस तरह आप अपने जीवन को खुद ही सफल बना सकते हैं।
 
 

इसके अलावा आप क्या जानेंगे –

  • जब तक आप किसी चीज को प्राप्त नहीं कर लेते तब तक आप उस चीज से बहुत दूर हैं।
  • अपने जीवन में होने वाली घटनाओं का भार कभी अपने माता पिता पर नहीं डालना चाहिए।
  • बड़ा सोचने का महत्व और उसे पाने की लालसा।
 
 

Total Recall Book Summary in Hindi – अर्नाल्ड Schwarzenegger की जीवन की कहानी

 

एक संघर्ष भरा बचपन देने के बाद अमेरिका ही अर्नाल्ड की कर्म भूमि बनी।

 
अर्नाल्ड 1947 में ऑस्ट्रिया में पैदा हुए थे। ऑस्ट्रिया के लिए वो साल बहुत दुखदायी था क्योंकि उसी साल ऑस्ट्रिया को विश्व युद्ध में हार का सामना करना पड़ा था। अर्नाल्ड की मा पूरे देश में इधर उधर घूम रही थी सिर्फ इस उम्मीद में कि उनके परिवार को रहने के लिए कोई सुरक्षित स्थान मिल जाये। अल्लो के जीवन की शुरुआत इससे और कठिन नहीं हो सकती थी। जीवन की इन शुरुआती कठिनाइयों ने अर्नाल्ड को बहुत मजबूत बनाया।
 
युद्ध हारने के बाद ऑस्ट्रिया के लोगों ने खुद को बदलना शुरु किया। वो चाहते थे कि दूसरे देशों के लोग इस बात को जाने की युद्ध हारने के बाद वो लोग बहुत मजबूत हुए हैं साथ ही साथ उनके अंदर गुस्सा भी उत्पत्र हुआ है।
 
लोगों से ज्यादा उनकी अगली जनरेशन यानी कि छोटे छोटे बच्चों के अंदर बहुत ज्यादा नाराजगी थी। अल्लो के पिता, गुस्ताव उन्हीं लोगों में से जिनको युद्ध में हार से काफी दुख पहुंचा था।
 
गुस्ताव ने बचपन से ही अनल्डि और उनके भाई को काफी सताया। उन दोनों भाइयों के लिए पूरे दिन का रुटीन तैयार रहता था। दोनों भाई सुबह 6 बजे है उठ जाते थे। उन दोनों को सुबह का नाश्ता तब तक नहीं मिलता था जब तक दोनों सुबह की एक्सरसाइज को पूरी तरह कंप्लीट न कर लें। उसके बाद उनको फुटबॉल और एथलेटिक्स का भी जमकर अभ्यास करना होता था। इतनी मेहनत के बावजूद दोनों में से अगर कोई भी कुछ गलत काम करता था तो फिर गुस्ताव उनको बेल्ट से पीटते भी थे।
 
अल्लो ने बाद में बताया कि सिर्फ वो ही इकलौते ऐसे बालक नहीं थे जिसके साथ इतना स्ट्रिक्ट व्यवहार किया जाता था। उन्होंने कहा कि एक बार उनके क्लास टीचर ने क्लास के एक बच्चे को उसकी गलती की संज्ञा देने के लिए उसका सर डेस्क पर पटक दिया था।
 
अपने पिता के अत्याचार से बचने के लिए अर्नाल्ड ने यह सोच लिया था कि वो उन से दूर चले जायेंगे। इसलिए जब वो 12 साल के थे तब उन्होंने निशय किया कि वो अमेरिका जा कर वहां नए जीवन की शुरुआत करेंगे। और उसी दिन के बाद से ऑस्ट्रिया में उनको जो भी छोटा मोटा काम मिलता था उसको करते थे और अपनी आजादी के सपने को पूरा करने के लिए कमाए हुए पैसों को सेव करते थे। किसी और देश को न चुत कर उन्होंने अमेरिका को इसलिए चुना था क्योंकि उनको पता था अमेरिका में सभी को अपनी तरह से जीवन जीने की आजादी है और अमेरिका से ताकतवर देश भी कोई दूसरा नहीं है। अनल्डिं अमेरिका इसलिए भी जाना चाहते थे क्योंकि अमेरिका ने हॉलीवुड और कोका कोला का अविष्कार किया था और ये दोनों ही चीजें अर्नाल्ड को काफी लुभाती थीं।
 
 

पहली बार में अर्नाल्ड अपनी क्षमता को पहचान नहीं पाए और मिस्टर यूनिवर्स बनने से चूक गए।

 
 बॉडी बिल्डिंग में अर्नाल्ड का इंटरेस्ट तब्बू जब उन्होंने अपना हाई स्कूल पूरा कर लिया। अर्नाल्ड पूरी तरह नेचुरल थे और इसी वजह से जूनियर वर्ग के कॉम्पिटिशन को जीतने में उनको कभी मुश्किल नहीं हुई। उसके बाद उनको एहसास हुआ की अब उनको बड़े कॉम्पिटिशन में हाथ आजमाना चाहिए इसलिए उन्होंने जर्मनी जाने का निश्चय किया और फेसला लिया कि वो मिस्टर यूनिवर्स प्रतियोगिता में भाग लेंगे।
 
म्युनिक पहुंचने के बाद उन्होंने एक जिम में काम करना शुरु कर दिया। जिम के मालिक साथ उनके रिश्ते कुछ खास अच्छे नहीं थे। जॉब होने के बावजूद अर्नाल्ड के पास पैसे की कमी रहती थी। और इसी वजह से उनको जिम में ही रहना पड़ता था। और उसी जिम में उन्होंने खुद को 1966 में लदन में होने वाले मिस्टर यूनिवर्स प्रतियोगिता के लिए तैयार किया। इस प्रतियोगिता के लिए उन्होंने जमकर तैयारी करनी शुरू करी। वह काम पर जाने से पहले और उसके बाद 2 घंटे जिम में व्यतीत करते थे। बाद में डिनर के बाद 1 घण्टा एक्स्ट्रा वर्कआउट करते थे।
 
पर अर्नाल्ड के द्वारा की गई मेहनत किसी काम नहीं आयी क्योंकि बाद में उनको एहसास हुआ कि उनकी एप्लीकेशन प्रतियोगिता के मुख्य अधिकारी के पास तक पहुंची ही नहीं। और इसकी वजह था उस जिम का मालिक था जिसमें की स्नाल्ड काम करते थे। जिम के मालिक का कहना था कि उनको लगता था कि अगर अर्नाल्ड जिम में काम करना छोड़ देंगे तक उनका धंधा मंदा पड़ जायेगा।
 
लेकिन इसके बावजूद अर्नाल्ड की किस्मत उनके काम आयो। प्रतियोगिता के ऑर्गेनाइजर ने डेडलाइन निकल जाने के बावजूद अर्नाल्ड की एप्लीकेशन को स्वीकार लिया। जिम के मालिक के द्वारा किया गया गलत काम आस पास के एरिया के सभी लोगों को पता चल गया था। इसी वजह से एक दूसरे जिम के मालिक ने दया भाव से अनाल्ड लंदन जाने की टिकट का इंतजाम करवाया। अर्नाल्ड प्रतियोगिता में भाग लेने को लेके काफी उत्साहित थे। उन्हें इस बात पर ज्यादा यकीन नहीं था कि वो प्रतियोगिता जीत सकेंगे। लेकिन जब उन्होंने देखा कि बाकी के सारे प्रतियोगी में से वो ही सबसे ज्यादा बलशाली और स्ट्रांग हैं तो उन्हें लगा कि अगर वो थोड़ी से मेहनत और कर लेते तो शायद कॉम्पिटिशन में सेकंड आने की बजाय फर्स्ट आते।
 
इस बात ने अर्नाल्ड के जीवन को नई दिशा दी। उन्होंने निश्चय किया आज के बाद वो तभी किसी प्रतियोगिता का हिस्सा बनेंगे जब उन्हें इस बात का भरोसा हो कि जीत उनकी ही होगी। उनका दृढ़ निश्चय उनके काम आया और 1967 में हुई मिस्टर यूनिवर्स प्रतियोगिता में वो विजयी हुए।
 
 

सही मेंटर की सलाह ने अर्नाल्ड की लाइफ बदल दी।

 
 1967 में पहली बार मिस्टर यूनिवर्स बनने के बाद अगले साल फिर से अर्नाल्ड में उस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और एक बार फिर उनको मिस्टर यूनिवर्स के खिताब से नवाजा गया। प्रतियोगिता जीतने के बाद जब वो वापस अपने होटल के कमरे में आये तो पहले से वहां एक टेलीग्राम उनका इन्तजार कर रहा था। इस टेलीग्राम को भेजा था जो वेदर ने जो उस समय दुनिया के सबसे अच्छे बॉडी बिल्डिंग एथलीट थे। उन्होंने अर्नाल्ड को लॉस एंजेलिस बुलाया और साथ ही साथ उनको अपने साथ ट्रेनिंग करने के लिए आमंत्रित भी किया।
 
जो वेदर को इस बात पर पूरी तरह यकीन था कि अल्डि अपने समय के सबसे बड़े बॉडी बिल्डर बनेंगे। जो ने अल्डि को फंड देना स्टार्ट किया। उन्होंने रोनाल्डो को घर के साथ साथ कार भी दी। उन्होंने अर्नाल्ड को अपनी मनमर्जी से जिम में वर्कआउट करने की अनुमति दी।
 
जो न सिर्फ एक मेंटर थे बल्कि वो एक बिजनेसमैन भी थे वो बॉडी बिल्डिंग से जुड़े हर प्रोडक्ट का व्यापार करते थे। जो ने रोनाल्डो को बिजनेस के बारे में भी ज्ञान देने शुरु किया। चौ अर्नाल्ड को अपने साथ मीटिंग में भी ले जाया करते थे। इसके तुरंत बाद रोनाल्डो को लगने लगा कि उनका जीवन भी बिजनेसमैन के तौर पर गुजर जाएगा। लेकिन जो के पास अर्नाल्ड के लिए अलग प्लान थे। अर्नाल्ड ने 1969 में हॉलीवुड में एंट्री ली।
 
जो उसके बाद रुके नहीं वो चाहते थे कि रोनाल्डो को और फेमस बनाया जाए, इसलिए उन्होंने 22 वर्षीय अर्नाल्ड की एक फिल्म में लीड रोल में सबके सामने पेश किया। उस फिल्म का नाम था हरक्यूलस इन न्यूयॉर्क। जो ने अर्नाल्ड को एक्टिंग के छेत्र में सफल बनाने के लिए
 
फिल्म के प्रोड्यूसर से कुछ सफेद झूट भी बोले। उन्होंने प्रोड्यूसर को बताया कि रोनाल्डो ने एक्टिंग की ट्रेनिंग ले रखी है। उन्होंने यह भी कहा था कि अर्नाल्ड को अच्छी इंग्लिश आती है परन्तु जब बात में प्रोड्यूसर को पता चला कि अर्नाल्ड की इंग्लिश कमजोर है तो फिर उनको फ़िल्म में इबिंग का इस्तेमाल करना पड़ा। हालांकि इसके बावजूद अर्नाल्ड की पहली फ़िल्म फ्लॉप साबित हुई लेकिन अर्नाल्ड इतने दृढ़ निश्चित थे कि हॉलीवुड में भी उनको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता था।
 
 

अर्नाल्ड ने अपने जीवन सबसे बड़ी फिल्म एक समय पर लगभग मिस कर दी थी।

 
 1982 में अर्नाल्ड को उनके करियर की सफल फ़िल्म मिली। उस फिल्म का नाम था कॉनन द बारबैरियन। अर्नाल्ड ने पहले ये सोचा था की अपनी फिल्मों के जरिये वो लोगों को बॉडी बिल्डिंग के बारे में समझाएंगे लेकिन कब उनकी फिल्म कॉनन द बारबैरियन हिट हुई तो उनको लगने लगा कि क्यों न बॉडी बिल्डिंग से हटकर एक्टिंग पर ध्यान दिया जाए और लोगों को अलग अलग तरह की फिल्म से एंटरटेन किया जाए।
 
अर्नाल्ड यह भी जानते थे कि उनकी एक्टिंग स्किल इतनी अच्छी नहीं है कि वो हॉलीवुड के सबसे बड़े स्टार बन सकें। परन्तु उन्होंने सोचा क्यों न वो अपने आप को सबके सामने एक एक्शन हीरो की तरह पेश करें क्योंकि उनकी बॉडी उनको इस बात की इजाजत देती थी।
 
अर्नाल्ड ने हमेशा की तरह नीचे से शुरुआत करने की बजाय सीधा हॉलीवुड में सबसे ऊपर पहुंचने का सपना देखा जिस तरह उन्होंने खुद को बॉडी बिल्डिंग में भी साबित किया था। फिल्म के निर्माता ओ जे, टर्मिनेटर की भूमिका के लिए सिम्पसन को देख रहे थे, लेकिन श्वार्ज़नेगर के साथ दोपहर के भोजन के दौरान उन्होंने महसूस किया कि ऑस्ट्रेलिया अभिनेता अर्नाल्ड एक मशीन की भूमिका के लिए सही विकल्प हैं। परन्तु अर्नाल्ड के मन कुछ अलग विचार थे। वो सोचते थे कि वो जनता के दिल में एक हीरो के तौर पर अपनी इमेज बनाएंगे परन्तु अब उनको एक विलन का रोल मिल रहा था। फ़िल्म के निर्माता ने उनको इस बात का विश्वास दिलाया कि टर्मिनेटर का रोल न अच्छा है और न ही बुरा है। उन्होंने कहा कि यह रोल अवश्य ही जनता को बहुत पसंद आएगा।
 
 

कैलिफोर्निया के बच्चों की मदद से अर्नाल्ड ने गवर्नरशिप की ओर कदम बढ़ाए।

 
 सिल्वेस्टर स्टेलोन की 1993 की फिल्म डिमोलिशन मैन में एक फ्यूचर का सीन था जहां मेन कैरेक्टर को फ्यूचर में ले जाया गया, खुद को वर्ष 2032 में श्रीनगर प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी के बाहर पाया। अल्लो को हालांकि अमेरिका की काउंसिल चलाने का मौका नहीं मिला क्योंकि काउंसिल सिर्फ वही न कर सकता था जो कि अमेरिका में पैदा हुआ हो परंतु अर्नाल्ड कैलिफोर्निया के गवर्नर बनने के बाद काउंसिल इन के बहुत करीब आ गए थे। कैलिफोर्निया 2003 में विश्व के सातवीं सबसे बड़ी इकॉनमी थी। आखिर अर्नाल्ड वहां तक कैसे पहुंचे?
 
हर साल के शुरुआत में अर्नाल्ड खुद के लिए पूरे साल क्या ब्यौरा लिखा करते थे कि आने वाले 12 महीनों में उनको कौन कौन से काम करने हैं। साल 2001 में उन्होंने लिखा थे कि वो जानना चाहते है कि गवर्नर बनने का एहसास कैसा होता है।
 
आखिर उन्हें अपने इस नए टारगेट के लिए मोटिवेशन कहाँ से मिला? अर्नाल्ड को कैलिफोर्निया में उस समय हुए डिक्लाइन के कारण यह आईडिया आया। 90 के दशक की शुरुआत में सिलिकॉन वैली में राज्य के टैक्स बेस को मिटा दिया गया था, इसके अलावा वहां बिजली का संकट था, जिसके बारे में कोई भी कुछ भी नहीं कर रहा था। अल्डि को लगा कि इन सब समस्याओं को दूर करने के लिए वो सबसे सही व्यक्ति हैं क्योंकि इतिहास उनके साथ था। उस समय के प्रेसिडेंट भी हॉलीवुड के जरिये ही प्रेसिडेंट की कुर्सी तक पहुंचे थे। और अमेरिका में देश को चलाने के लिए नाम और शोहरत की आवश्यकता होती है और ये दोनों ही चीजें उस समय अर्नाल्ड के पास मौजूद थीं।
 
परन्तु अनाल्ड को यह भी पता था कि अमेरिका के लोगों को इस बात का एहसास दिलाना होगा कि वो पॉलिटिक्स में इंटरेस्टेड हैं, न कि सिर्फ हॉलीवुड के दम पर वहां तक पहुंचे हैं। वोटर्स को से खुद को परिचित कराने के लिए उन्होंने एक नई स्कीम को शुरू किया, जिसकी उन्हें राज्य विधायिका और कानून के माध्यम से मार्गदर्शन करने की उम्मीद थी।
 
अर्नाल्ड का आईडिया बहुत ही सिंपल था। रिसर्च के मुताबिक उस समय अमेरिका में ज्यादातर म 3 बजे से लेकर 6 बजे तक होते थे। उनके अनुसार क्राइम को कम करने का सिर्फ एक तरीका था और वो ये कि स्कूल के बाद बच्चों को आफ्टर स्कूल क्लब में भेजा जाए जहां उनकी फिटनेस और उनके होमवर्क पर ध्यान दिया जाएगा। उनके इस आईडिया को लोगों ने बहुत पसंद किया और उसी वजह से 2003 में वो कैलिफोर्निया के गवर्नर बनें।
 
 

शायद अर्नाल्ड परफेक्ट न हों, पर उनको सफलता का स्वाद अवश्य पता था।

 
 किसी इंसान को मोटिवेशन देने के लिए आपका खुद का परफेक्ट होना आवश्यक नहीं है। यही बात अर्नाल्ड को खास बनाती थी। अर्नाल्ड पर्यावरण प्रेमी थे, वो कैलिफोर्निया के गवर्नर भी थे साथ साथ वो फिटनेस फ्रीक भी थे। उनकी एक और पसन्द थी वो थी सिंगा।
 
लेकिन कुछ चीजें ऐसी थी जिस अनुसरण अनल्डिं ने अपने पूरे जीवन के दौरान किया। तो अल्लो हमें क्या सलाह देते हैं?
 
सबसे पहली और सबसे अहम, कभी भी अपने पेरेंट्स को किसी बात का दोष न दें। कुछ लोगों के पेरेंट्स बहुत स्ट्रिक्ट होते हैं, कुछ के बहुत ज्यादा प्रोटेक्टिव होते हैं । परंतु हमें लगता है कि हमारे पेरेंट्स हमारी और अच्छी तरह से परवरिश कर सकते थे, लेकिन हम लोग को इस बात का एहसास होना चाहिए कि वह जितनी अच्छी तरह से कर सकते थे, उन्होंने हमेशा उससे अच्छा करते की कोशिश की।
 
अर्नाल्ड के पिता ने उनके बचपन में काफी सताया लेकिन इसके बावजूद अर्नाल्ड अपने पिता को कभी किसी बात के लिए दोषी नहीं ठहराते। लेकिन उनका मानना है कि जी के पिता की वजह से ही वह आज अपने जीवन में इतने अनुशासित हुए हैं। और साथ ही साथ उन्हीं की वजह से म्होंने ऑस्ट्रिया को छोड़कर अमेरिका जाने का निश्चय किया था। अनल्डिं का कहना है की कभी भी अपने पास्ट को अपने फ्यूचर के ऊपर हावी ना होने दें। अपने पास्ट को मूल कर अपने भविष्य को अच्छा बनाने की कोशिश करते रहना चाहिए।
 
अर्नाल्ड का दूसरा सफल होने का रुल यह है कि कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। हमने कई बार देखा है लोगों को कि वह लोग अपनी जीवन में घटित पिछली चीजों को लेकर काफी उत्साहित रहते हैं। लेकिन हमें ऐसा नहीं करना चाहिए हमें अपने जीवन में आने वाली चीजों के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए कि हमने पीछे क्या किया है। इस बात का उदाहरण हमें कामयाब संगीतकार बोनो से मिलता है जिन्होंने म्यूजिक इंडस्ट्री में सफल होने के बाद एड्स के मरीजों के लिए एक सराहनीय कार्य किया। बोलो को छोड़िए, अमेरिका के अभी के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप भी सफल होने के बाद रुके नहीं। उन्होंने अपना नया देवी से शुरु किया और उसके बाद प्रेसिडेंट बनने की होड़ में लगे रहे।
 
 बिल्कुल उसी तरह अर्नाल्ड भी कभी अपने जीवन में रुके नहीं। बॉडीबिल्डिंग से लेकर कैलिफोर्निया के गवर्नर बनने तक का सफर उन्होंने पीछे मुड़कर देखे बिना तय किया।
 
 

Conclusion –

 
 अर्नाल्ड से बेहतर डिटरमिनेटिड इंसान शायद हमें कोई दूसरा देखने को मिलेगा। बचपन में अपने पिता के द्वारा सताए जाने के बावजूद उन्होंने अपने जीवन में हर प्रकार की सफलता हासिल करी। ऑस्ट्रिया छोड़कर अमेरिका गए। वहां पर उन्होंने बॉडीबिल्डिंग में लगातार मेहनत की और कई सारे कंपटीशन जीते। उसके बाद उन्होंने हॉलीवुड में एंट्री ली और वहां भी सफल हुए और अंत में कैलिफोर्निया के गवर्नर बन कर लोगों की भी सेवा करी।
 
 

क्या करें।

 

हमेशा ऊंची सोच रखें और जीतने का प्रयास करते रहें।

 
अर्नाल्ड के जीवन से हमें सिर्फ यह सीखने को मिलता है कि वह कभी दूसरे स्थान के लिए नहीं गए, उन्होंने हमेशा पहले स्थान पर ही ऐम रखा और उसे पाने के लिए कोशिश करते रहे। उसी प्रकार हमें भी कभी किसी भी चीज में इस मोटिव के साथ हिस्सा नहीं लेना चाहिए कि हम सिर्फ उसमें हिस्सा ले रहे हैं, बल्कि हमें उसे जीतने की कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि अगर हम ऐसा सोच कर उसमें जाएंगे तो हम उसके लिए ज्यादा मेहनत करेंगे।
 
 
 तो दोस्तों आपको आज का हमारा यह बुक समरी कैसा लगा नीचे कमेंट करके जरूर बताये और इस बुक समरी को अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें।
 
 
आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,
 
Wish You All The Very Best.

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