Vikram Betal Story in Hindi – कौन अधिक साहसी?

Vikram Betal Story in Hindi – Hello दोस्तों, ये विक्रम बेताल की सत्रहवीं कहानी है, जिसमें बेताल विक्रम को फिर से एक नई कहानी सुनाता है और अंत में विक्रम को एक सवाल पूछता है और विक्रम ने उसका क्या जवाब दिया? अगर आपको जानना है कि बेताल ने कौनसी कहानी सुनाई और कौनसा प्रश्न किया, क्या आप उस सवाल का जवाब दे सकते हो, तो ये कहानी आगे पढ़ते रहिये। तो चलिए शुरू करते हैं।

Vikram Betal Story in Hindi – कौन अधिक साहसी?

चन्द्रशेखर नगर में रत्नदत्त नाम का एक सेठ रहता था। उसके एक लड़की थी। उसका नाम था उन्मादिनी। जब वह बड़ी हुई तो रत्नदत्त ने राजा के पास जाकर कहा कि आप चाहें तो उससे ब्याह कर लीजिए। राजा ने तीन दासियों को लड़की को देख आने को कहा। उन्होंने उन्मादिनी को देखा तो उसके रुप पर मुग्ध हो गयीं, लेकिन उन्होंने यह सोचकर कि राजा उसके वश में हो जायेगा, आकर कह दिया कि वह तो कुलक्षिणी है राजा ने सेठ से इन्कार कर दिया।

इसके बाद सेठ ने राजा के सेनापति बलभद्र से उसका विवाह कर दिया। वे दोनों अच्छी तरह से रहने लगे।

एक दिन राजा की सवारी उस रास्ते से निकली। उस समय उन्मादिनी अपने कोठे पर खड़ी थी। राजा की उस पर निगाह पड़ी तो वह उस पर मोहित हो गया। उसने पता लगाया। मालूम हुआ कि वह सेठ की लड़की है। राजा ने सोचा कि हो-न-हो, जिन दासियों को मैंने देखने भेजा था, उन्होंने छल किया है। राजा ने उन्हें बुलाया तो उन्होंने आकर सारी बात सच-सच कह दी। इतने में सेनापति वहाँ आ गया। उसे राजा की बैचेनी मालूम हुई। उसने कहा, “स्वामी उन्मादिनी को आप ले लीजिए।” राजा ने गुस्सा होकर कहा, “क्या मैं अधर्मी हूँ, जो पराई स्त्री को ले लूँ?”

राजा को इतनी व्याकुलता हुई कि वह कुछ दिन में मर गया। सेनापति ने अपने गुरु को सब हाल सुनाकर पूछा कि अब मैं क्या करूँ? गुरु ने कहा, “सेवक का धर्म है कि स्वामी के लिए जान दे दे।”

राजा की चिता तैयार हुई। सेनापति वहाँ गया और उसमें कूद पड़ा। जब उन्मादिनी को यह बात मालूम हुई तो वह पति के साथ जल जाना धर्म समझकर चिता के पास पहुँची और उसमें जाकर भस्म हो गयी।

इतना कहकर बेताल ने पूछा, “राजन्, बताओ, सेनापति और राजा में कौन अधिक साहसी था?”

राजा ने कहा, “राजा अधिक साहसी था; क्योंकि उसने राजधर्म पर दृढ़ रहने के लिए उन्मादिनी को उसके पति के कहने पर भी स्वीकार नहीं किया और अपने प्राणों को त्याग दिया। सेनापति कुलीन सेवक था। अपने स्वामी की भलाई में उसका प्राण देना अचरज की बात नहीं। असली काम तो राजा ने किया कि प्राण छोड़कर भी राजधर्म नहीं छोड़ा।”

राजा का यह उत्तर सुनकर बेताल फिर पेड़ पर जा लटका। राजा उसे पुन: पकड़कर लाया और तब उसने फिर से एक नई कहानी सुनायी।

Conclusion

तो दोस्तों आपको आज की यह Vikram Betal Story in Hindi कैसी लगी ?

आपने इस कहानी से क्या सीखा ?

अगर आपके मन में कोई भी सवाल या सुझाव है तो मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताये।

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

Wish You All The Very Best.

सम्बंधित लेख –

  1. Vikram Betal Story in Hindi – राजकुमारी किसको मिलनी चाहिए?
  2. Vikram Betal Story in Hindi – राजा या सेवक किसका काम बड़ा?
  3. Vikram Betal Story in Hindi – सबसे बढ़कर कौन?
  4. Vikram Betal Story in Hindi – सबसे बडा त्याग किसका?
  5. Vikram Betal Story in Hindi – सबसे कोमल कौन सी रानी?
  6. Vikram Betal Story in Hindi – वह मरा क्यों?
  7. Vikram Betal Story in Hindi – अपराधी कौन?
  8. Vikram Betal Story in Hindi – चोर क्यों रोया?
  9. Vikram Betal Story in Hindi – किस की पत्नी?
  10. Vikram Betal Story in Hindi – सबसे बड़ा काम किसने किया?

Leave a Comment